Félix Nadar: फोटोग्राफी के एक अग्रदूत
प्रारंभिक जीवन और शुरुआत
- जन्म: गस्पार्ड-फेलिक्स टौर्नाचोन, 5 अप्रैल, 1820 को पेरिस में हुए (हालांकि कुछ स्रोत ल्यों का संकेत देते हैं)।
- उनके पिता, विक्टर टौर्निचोन, एक मुद्रक और पुस्तक विक्रेता थे।
- प्रारंभ में उन्होंने चिकित्सा का अध्ययन किया, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद वित्तीय बाधाओं के कारण इसे छोड़ दिया।
- नादार, जैसा कि वे प्रसिद्ध हुए, ने एक व्यंग्यकार और उपन्यासकार के रूप में अपना करियर शुरू किया और विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान दिया।
व्यंग्य से फोटोग्राफी तक का सफर
- उन्होंने लगभग 1853 के आसपास फोटोग्राफी के साथ प्रयोग करना शुरू किया।
- 1854 में 113 rue St. Lazare में अपना पहला फोटोग्राफिक स्टूडियो खोला, और बाद में 1860 में 35 Boulevard des Capucines में स्थानांतरित हो गए।
- अपने प्रभावशाली और मनोवैज्ञानिक रूप से गहरी अंतर्दृष्टि वाले चित्रों के लिए उन्हें जल्द ही पहचान मिली।
- परंपराओं का त्याग: नादार ने पोर्ट्रेट में प्रचलित भव्य और आडंबरपूर्ण पृष्ठभूमि को त्याग दिया, और इसके बजाय प्राकृतिक प्रकाश तथा व्यक्ति के व्यक्तित्व पर ध्यान केंद्रित करने को प्राथमिकता दी।
एरियल फोटोग्राफी (आकाशीय फोटोग्राफी) का बीड़ा उठाना
- 1858 में, नादार गुब्बारों का उपयोग करके हवाई तस्वीरें लेने वाले पहले व्यक्ति बने।
- उन्होंने ऊंचाई पर फोटोग्राफिक प्लेट विकसित करने से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को पार करने के लिए अपने गुब्बारा बास्केट के लिए एक गैस-रोधी सूती आवरण का आविष्कार किया।
- उन्होंने फोटोग्राफी में कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था की भी शुरुआत की, विशेष रूप से पेरिस के कैटाकॉम्ब्स (Catacombs) के भीतर।
- Le Géant: 1863 में उन्होंने “Le Géant” (द जाइंट) नामक एक विशाल गुब्बारे के निर्माण का आदेश दिया, जिसने जूल वर्ने के *Five Weeks in a Balloon* को प्रेरित किया।
प्रमुख उपलब्धियां और प्रभाव
- चित्रण (Portraiture): उन्होंने विक्टर ह्यूगो, चार्ल्स बौडेलरे, सारा बर्नहार्ट और गुस्ताव कुर्बेट सहित कई प्रमुख हस्तियों की तस्वीरें खींचीं।
- पेरिस की घेराबंदी (1870-71) के दौरान गुब्बारा उड़ानों का उपयोग करके दुनिया की पहली एयरमेल सेवा स्थापित की।
- 1874 में अपने स्टूडियो में पहली प्रभाववादी (Impressionist) प्रदर्शनी की मेजबानी की, जिससे उभरते कलाकारों को एक महत्वपूर्ण मंच मिला।
- 1886 में उन्होंने पहला 'फोटो-इंटरव्यू' प्रकाशित किया, जिसमें रसायनज्ञ मिशेल यूजीन शेवरुल शामिल थे।
उत्तर जीवन और विरासत
- 1895 से 1909 तक अपना स्टूडियो मार्सिले स्थानांतरित कर दिया।
- 20 मार्च, 1910 को पेरिस में उनका निधन हुआ और उन्हें पेरे लेशाइज़ कब्रिस्तान में दफनाया गया है।
- उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र, पॉल नादार ने स्टूडियो का संचालन जारी रखा।
- Quand j’étais photographe: उन्होंने अपने जीवन और कार्य पर चिंतन करते हुए एक संस्मरण प्रकाशित किया, जो 19वीं सदी की फोटोग्राफी में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
- ऐतिहासिक महत्व: नादार की नवीन तकनीकों और कलात्मक दृष्टि ने एक कला रूप के रूप में फोटोग्राफी के विकास को गहराई से प्रभावित किया। उनके चित्र आज भी पेरिस के बौद्धिक और कलात्मक हलकों के प्रतिष्ठित प्रतीक बने हुए हैं।